एक दो तीन चार - अल्का याग्निक


एक दो तीन चार

 


गाना: एक दो तीन चार.. 
फिल्म: तेजाब  (1988)
गायक: अल्का याग्निक, अमित कुमार 
गीतकार: जावेद अख्तर 
संगीतकार: लक्ष्मीकांत - प्यारेलाल 



एक दो तीन चार पाँच छः सात आठ नौ दस ग्यारह बारह तेरह
तेरा करूँ दिन गिन-गिन के इंतज़ार
आजा पिया आई बहार
एक दो तीन...


चौदह को तेरा संदेसा आया
पंद्रह को आऊँगा ये कहलाया
चौदह को आया न पंद्रह को तू
तड़पा के मुझको तूने क्या पाया
सोलह को भी, सोलह किये थे सिंगार
आजा पिया आई...


सत्रह को समझी संग छूट गया
अठारह को दिल टूट गया
रो-रो गुज़ारा मैंने सारा उन्नीस
बीस को दिल के टुकड़े हुए बीस
फिर भी नहीं दिल से गया तेरा प्यार
आजा पिया आई...


इक्कीस बीती, बाईस गई
तेईस गुज़री, चौबीस गई
पच्चीस छब्बीस ने मारा मुझे
बिरहा की चक्की में मैं पिस गई
दिन बस महीने के हैं और चार
आजा पिया आई...


दिन बने हफ़्ते, रे हफ़्ते महीने
महीने बन गये साल
आके ज़रा तू देख तो ले
क्या हुआ है मेरा हाल
दीवानी दर-दर मैं फिरती हूँ
न जीती हूँ, ना मैं मरती हूँ
तन्हाई की रातें सहती हूँ
आजा-आजा-आजा-आजा-आजा
आजा के दिन गिनती रहती हूँ
एक दो तीन...





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