परदेसियों से ना अँखियाँ मिलाना - मोहम्मद रफ़ी

 

परदेसियों से ना अँखियाँ मिलाना




गाना: परदेसियों से ना अँखियाँ मिलाना
फिल्म: जब जब फूल खिले (1965)
गायक: मोहम्मद रफ़ी
गीतकार: आनंद बक्शी 
संगीतकार:  कल्याणजी-आनंदजी 


परदेसियों से ना अँखियाँ मिलाना
परदेसियों को है इक दिन जाना

सच ही कहा है पंछी इनको
रात को ठहरें तो उड़ जाएं दिन को
आज यहाँ, कल वहाँ है ठिकाना
परदेसियों से ना...

बागों में जब-जब फूल खिलेंगे
तब-तब ये हरजाई मिलेंगे
गुज़रेगा कैसे पतझड़ का ज़माना
परदेसियों से ना...

प्यार से अपने ये नहीं होते
ये पत्थर हैं ये नहीं रोते
इनके लिये ना आँसू बहाना
परदेसियों से ना...

ना ये बादल ना ये तारे
ये कागज़ के फूल हैं सारे
इन फूलों के न बाग लगाना
परदेसियों से ना...

हमने यही इक बार किया था
इक परदेसी से प्यार किया था
रो-रो के कहता है दिल ये दीवाना
परदेसियों से ना...

आती है जब ये रुत मस्तानी
बनती है कोई न कोई कहानी
अबके बरस देखे बने क्या फ़साना
परदेसियों से ना..







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